प्राकट्य
बरसाना में लाडली जी
बरसाना के ब्रह्मांचल पर्वत पर श्री लाडली जी नारायण भट्ट जी के आगे प्रकट हुईं। जिस मंदिर में आज लाखों लोग दर्शन को आते हैं, उसकी सेवा की परंपरा यहीं से शुरू होती है।

कथा, जैसी स्रोतों में है
ब्रज के लुप्त तीर्थ खोजते हुए उन्होंने पहले ऊंचागांव में रेवती रमण, यानी दाऊजी, का प्राकट्य कर मंदिर बनाया। फिर बरसाना में ब्रह्मांचल पर्वत पर राधा जी के विग्रह का प्राकट्य कर वहीं मंदिर की स्थापना कराई। स्रोत: हिस्ट्री पंडित
परंपरा के अनुसार श्री लाडली जी उनके आगे प्रकट हुईं, और उन्होंने उनकी सेवा अपने शिष्य नारायण दास गोस्वामी को सौंपी। स्रोत: वृंदावन टुडे
वे बरसाना की राधा को अपनी बेटी मानकर पूजते थे। स्रोत: संगीत नाटक, 2005
राधा जी को लाडो नाम उन्हीं का दिया माना जाता है। वे उन्हें लाडो, लड़ैती और लाडली कहकर पुकारते थे, और इसी से बरसाना का मंदिर लाडली जी का मंदिर कहलाता है। स्रोत: विवेक दत्त, अख़बार लेख
महाराज जी से सुनी कथा जल्द यहाँ, उन्हीं के शब्दों में।
सेवा की परंपरा
नारायण दास गोस्वामी के वंशज आज श्रीजी के सेवायत गोस्वामी हैं। ऊंचागांव के भट्ट उनके गुरु माने जाते हैं: सेवायत गोस्वामी इसी परंपरा से कंठी दीक्षा लेते हैं, और उसके बाद ही मंदिर में सेवा करते हैं।
इसलिए यह संबंध केवल इतिहास नहीं है। यह आज भी चलती गुरु परंपरा है, जिससे लाडली जी की पूजा की रीति पीढ़ी दर पीढ़ी आगे जाती है।
स्रोत: वृंदावन टुडे
राधा यंत्र
राधाष्टमी पर गर्भगृह के भीतर होने वाली पूजा में नारायण भट्ट जी के स्थापित राधा यंत्र की पूजा भी होती है, और यह पूजा उनकी परंपरा करती है। स्रोत: वृंदावन टुडे
राधाष्टमी की भोर
पट खुलने से पहले गर्भगृह के भीतर उनकी परंपरा पूजा करती है। यह मूल शांति यज्ञ से शुरू होती है, उत्सव की शांति और मंगल के लिए। गोस्वामी श्री कृष्णानंद भट्ट जी बताते हैं कि इसमें ये पूजाएँ होती हैं:
- निज गर्भगृह पूजा।
- नारायण भट्ट जी के स्थापित राधा यंत्र की पूजा।
- सप्त घृत मातृका पूजा।
- लाडली जी का निज अभिषेक, पंचामृत से।
- आरता, जिसे उत्सव आरती भी कहते हैं।
पूरी पूजा लगभग ढाई घंटे चलती है। लगभग 4 बजे पट खुलते हैं, और फिर सबके लिए पंचामृत अभिषेक होता है।
2026 में यह पूजा गोस्वामी श्री कृष्णानंद भट्ट जी ने की। स्रोत: वृंदावन टुडे
इस पन्ने के स्रोत
- वृंदावन टुडे, जगन्नाथ पोद्दार: श्री लाडली जी मंदिर, बरसाना की राधाष्टमी की पूजा, 19 सितंबर 2026
- विवेक दत्त मथुरिया, हिस्ट्री पंडित, 6 मई 2020
- छेदीलाल कांस्यकार, द बूढ़ी लीला ऑफ़ ब्रज, संगीत नाटक, खंड 39, अंक 2, 2005
- विवेक दत्त (मथुरा), 'नारायण भट्ट ने दिया राधा को लाडो नाम', अख़बार का इतिहास पन्ना
- अंग्रेज़ी विकिपीडिया: राधा रानी मंदिर
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