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- मुखपृष्ठचरितामृत, ब्रजोत्सव चंद्रिका, ब्रज भक्ति विलास, श्री भक्तमाल, प्रियादास, 1712, ग्राउज़, 1883, ब्रज और ब्रज यात्रा, 1959, हाइन, 1972, एंटविसल, 1987, मंदिर की वेबसाइट, अमर उजाला, 2023, दैनिक जागरण, 2026, वृंदावन टुडे, 2026
- श्री लाडली जीचरितामृत, लघु चरितामृत, ब्रजोत्सव चंद्रिका, ग्राउज़, 1883, मीतल, 1962, मीतल, 1966, मीतल, 1968, स्नातक, 1957, भक्तकोश, 1989, हाइन, 1972, एंटविसल, 1987, ब्रज की झाँकी, मंदिर की वेबसाइट, अमर उजाला, 2021, अमर उजाला, 2023, अमर उजाला, 2025, दैनिक जागरण, 2018, दैनिक जागरण, 2026, दैनिक भास्कर, 2024, वृंदावन टुडे, 2026, वृंदावन टुडे, विवेक दत्त, अख़बार लेख, अंग्रेज़ी विकिपीडिया
- जीवनचरितामृत, लघु चरितामृत, ब्रजोत्सव चंद्रिका, ब्रज भक्ति विलास, श्री भक्तमाल, प्रियादास, 1712, प्रताप सिंह, 1866, ग्राउज़, 1883, मीतल, 1966, मीतल, 1968, ब्रज और ब्रज यात्रा, 1959, रास लीला: एक परिचय, 1959, हाइन, 1972, एंटविसल, 1987, अमर उजाला, 2023, दैनिक जागरण, 2018, वृंदावन टुडे, ब्रज ब्रेकिंग, 2025, ब्रज ब्रेकिंग, दाऊजी 2025, हिस्ट्री पंडित, हिंदी विकिपीडिया, इस्कॉन (ऊंचागांव), इस्कॉन (ललिता सखी)
- ब्रजचरितामृत, ब्रजोत्सव चंद्रिका, ब्रज भक्ति विलास, श्री भक्तमाल, प्रियादास, 1712, ग्राउज़, 1883, मीतल, 1966, रास लीला: एक परिचय, 1959, हाइन, 1972, एंटविसल, 1987, मंदिर की वेबसाइट, दैनिक जागरण, 2026, हिंदुस्तान, 2026, ब्रज ब्रेकिंग, 2025, ब्रज ब्रेकिंग, दाऊजी 2025, ब्रज ब्रेकिंग, ललिता 2025, ब्रज ब्रेकिंग, परिक्रमा 2025, हिस्ट्री पंडित
- ग्रंथचरितामृत, लघु चरितामृत, ब्रजोत्सव चंद्रिका, ब्रज भक्ति विलास, ग्राउज़, 1883, हाइन, 1972, एंटविसल, 1987
- परंपराचरितामृत, ब्रजोत्सव चंद्रिका, मीतल, 1962, मीतल, 1966, अमर उजाला, 2023, अमर उजाला, 2025, हिंदुस्तान, 2026, प्रभात ख़बर, 2023, वृंदावन टुडे, 2026, वृंदावन टुडे, 2023, ब्रज ब्रेकिंग, 2025, ब्रज ब्रेकिंग, 2024, ब्रज ब्रेकिंग, दाऊजी 2025, ब्रज ब्रेकिंग, ललिता 2025, ब्रज ब्रेकिंग, परिक्रमा 2025, ब्रज ब्रेकिंग, होली 2024
- यात्राचरितामृत, ब्रजोत्सव चंद्रिका, प्रियादास, 1712, ब्रज और ब्रज यात्रा, 1959, एंटविसल, 1987, हिंदुस्तान, 2026, ब्रज ब्रेकिंग, 2025, ब्रज ब्रेकिंग, ललिता 2025, हिस्ट्री पंडित, इस्कॉन (ऊंचागांव)
- मीडियाचरितामृत, ब्रजोत्सव चंद्रिका, ब्रज भक्ति विलास, प्रियादास, 1712, ग्राउज़, 1883, मीतल, 1966, मीतल, 1968, स्नातक, 1957, हाइन, 1972, एंटविसल, 1987, मंदिर की वेबसाइट, वृंदावन टुडे, 2026
किसने क्या कहा
साइट की मुख्य बातें, और वे किन स्रोतों पर टिकी हैं।
| बात | स्रोत |
|---|---|
| श्री लाडली जी की कथा, लाड़िलीलाल नाम, नारायणदास जी को सेवा, ब्रजाचार्य की उपाधि, वामन द्वादशी | चरितामृत |
| जन्मस्थान पुष्कली, गोदावरी पर; बारह वर्ष पर कृष्ण का आदेश; राधाकुंड पर पाँच वर्ष; बलदेव जी का पहला अभिषेक, 1555; राधाष्टमी की भोर की विधि | ब्रजोत्सव चंद्रिका, लघु चरितामृत |
| 137 वन और 16 वट; दो यात्राएँ; संवत 1609 में राधाकुंड पर पूरा | ब्रज भक्ति विलास |
| वराह पुराण के बताए मथुरा मंडल के गुप्त स्थल उन्होंने प्रकट किए | श्री भक्तमाल |
| गुरु कृष्णदास ब्रह्मचारी; जगह जगह रास; त्रिवेणी के सोते | प्रियादास, 1712 |
| ब्रज की हर झील और कुंज का नाम उन्हीं से; वन यात्रा सबसे पहले उन्होंने स्थापित की; पिता का नाम पुरानी प्रति में | ग्राउज़, 1883 |
| वन यात्रा ब्रज की सबसे पुरानी यात्रा सूची; ब्रज भक्ति विलास सबसे विस्तृत ग्रंथ; गोवर्धन परिक्रमा की लंबाई | एंटविसल, 1987 |
| सोलहवीं सदी में रास के सबसे बड़े संयोजक; रास का रूप उनसे पुराना | हाइन, 1972, मीतल, 1966, रास लीला: एक परिचय, 1959 |
| प्राकट्य का वर्ष संवत 1626 (1569); नारायणदास जी ने पहले झोंपड़ी में सेवा की; रास में 'श्री लाड़िलीलाल की जय'; बूढ़ी लीला प्रेमांकुर नाटक पर | स्नातक, 1957, मीतल, 1966 |
| सबसे पुराना मंदिर राजा बीर सिंह देव का, नींव जनवरी 1619; ब्रजोद्धारक; दामोदर जी का जन्म संवत 1614; नारायणदास जी का पद | मीतल, 1966, मीतल, 1968, मीतल, 1962 |
| मंदिर पाँचवाँ है; पहले के मंदिर लक्खा बंजारा और राजा टोडरमल के; आषाढ़ शुक्ल 2 का उत्सव | मंदिर की वेबसाइट |
| पर्वत पर तप और भजन का स्थान नारायणदास जी का | ब्रज की झाँकी, अमर उजाला, 2021 |
| मानस पिता; परिवार का बेटी का भाव; बरसाना में बेटियों के नाम | अमर उजाला, 2023, दैनिक जागरण, 2018, वृंदावन टुडे, दैनिक भास्कर, 2024 |
| राधाष्टमी 2026 की भोर की पूजा और उसकी विधि | वृंदावन टुडे, 2026, दैनिक जागरण, 2026, अमर उजाला, 2025 |
| 2023 में मंदिर के पुजारी ने भट्ट परिवार को गुरु परिवार कहा | प्रभात ख़बर, 2023 |
| लाड़ले ठाकुर दाऊजी मंदिर में | हिस्ट्री पंडित |
| महाराज जी के उत्सव: जयंती, ललिता जन्मोत्सव, नाग पंचमी, अष्ट सखी परिक्रमा, होली | ब्रज ब्रेकिंग, 2025, ब्रज ब्रेकिंग, 2024, ब्रज ब्रेकिंग, ललिता 2025, ब्रज ब्रेकिंग, दाऊजी 2025, ब्रज ब्रेकिंग, परिक्रमा 2025, ब्रज ब्रेकिंग, होली 2024 |
जहाँ स्रोत अलग कहते हैं
हम इन्हें छिपाते नहीं। परिवार और विद्वानों से पूछकर इन्हें पक्का करते रहेंगे।
श्री लाडली जी
- प्राकट्य का वर्ष
- संवत 1626, आषाढ़ शुक्ल 2, यानी 1569 (बाबा कृष्णदास 1949 से; मीतल; मंदिर का उत्सव)। यह वर्ष चरितामृत के श्लोकों में नहीं है, जैसा मीतल ने 1966 में लिखा; हाइन (1972) भी 1569 देते हैं। संवत 1602, 1604 और 1606 भी छपे हैं, और '450 से 600 वर्ष पहले' जैसी गोल संख्याएँ भी। उनकी ब्रजोत्सव चंद्रिका का एक संकल्प संवत 1612 (1555) में ही पर्वत के मंदिर में युगल की बात करता है।
- कथा के दूसरे रूप
- चरितामृत: दर्शन, और आधी रात के बाद पर्वत पर प्राप्ति। लघु चरितामृत: गुरु ने बरसाना के शिष्य को मूर्ति दी। अमर उजाला (2021): सपने में संकेत मिला और उन्होंने शिष्य के साथ मूर्ति निकाली। गीता प्रेस की ब्रज की झाँकी: लाडली जी ने सपने में नारायणदास जी से कहा कि वे उनके भजन के आसन के नीचे हैं, और उन्होंने खोदकर निकाला।
- युगल या केवल राधा
- चरितामृत, ब्रजोत्सव चंद्रिका और मंदिर: लाड़िलीलाल, यानी युगल। लघु चरितामृत और अधिकतर समाचार: केवल राधा जी।
- नाम
- चरितामृत युगल का नाम भट्ट जी का दिया बताता है, पर 'लाड़िली' को माता पिता के लाड़ से समझाता है; गोदावरी पर कृष्ण यह नाम पहले ही ले चुके थे। ब्रजोत्सव चंद्रिका इसे ब्रह्मा जी का वरदान कहती है। ग्राउज़ (1883) 'लाडली' को राधा की स्थानीय उपाधि कहते हैं, जिसका अर्थ है प्रिय।
- सबसे पुराना मंदिर
- राजा बीर सिंह देव, संवत 1675 (मीतल; एंटविसल 'माना जाता है' लिखते हैं)। अंग्रेज़ी विकिपीडिया का '1675 ई.' इसी संवत को ईसवी पढ़ लेने की भूल लगती है।
- नारायणदास जी के वर्ष
- चरितामृत: अस्सी वर्ष की आयु में शिष्य बने। मीतल (1962): लगभग संवत 1600 से 1700 के बीच। भक्तकोश (1989) इन वर्षों को अलग पढ़ता है।
- पर्वत पर तपस्या
- चरितामृत पर्वत पर उनकी साधना को गोपी भाव में विचरना बताता है, और किसी आसन, गुफा या व्रत का नाम नहीं लेता; कोई पुराना ग्रंथ ब्रह्मांचल पर उनकी तपस्या का अलग वर्णन नहीं करता। पर्वत पर तप और भजन का जो स्थान आज दिखाया जाता है, वह उनके शिष्य नारायणदास जी, यानी स्वामी जी, का है (ब्रज की झाँकी; अमर उजाला 2021)।
- मानस पिता और बेटी का भाव
- अमर उजाला (2023) उन्हें राधा रानी का मानस पिता कहता है, और लिखता है कि इसी प्रेम से उन्होंने लाडली नाम दिया; वृंदावन टुडे लिखता है कि वे राधा रानी को बेटी की तरह पूजते थे। यह भाव किसी पुराने ग्रंथ में लिखा नहीं मिलता; यह परिवार की जीवित स्मृति है।
- लाडो नाम
- मथुरा के पत्रकार विवेक दत्त का एक अख़बार लेख कहता है कि राधा जी को 'लाडो' नाम भी उन्हीं ने दिया। अख़बार और तिथि अभी पता नहीं; कोई पुराना ग्रंथ यह नहीं कहता।
- राधाष्टमी 2026 की पूजा
- वृंदावन टुडे: गोस्वामी श्री कृष्णानंद भट्ट जी महाराज ने पूजा की। दैनिक जागरण: अभिषेक आचार्य सूसट महाराज के सान्निध्य में शुरू हुआ। अमर उजाला सूसठ महाराज और श्री कृष्णानंद भट्ट जी को एक ही बताता है।
जीवन
- जन्म का दिन
- वैशाख शुक्ल 14, नृसिंह चतुर्दशी (चरितामृत; आज की जयंती), या वैशाख पूर्णिमा (ब्रजोत्सव चंद्रिका)। दोनों में कुछ घंटों का ही अंतर हो सकता है।
- जन्मस्थान
- गोदावरी तट पर पुष्कली, यानी मथुरापट्टन (ब्रजोत्सव चंद्रिका; लघु चरितामृत); मदुरा या मदुरै (बाबा कृष्णदास 1947 से, मीतल, हाइन, मंदिर की वेबसाइट); ऊंचागांव (प्रताप सिंह, 1866 से 1872, शायद कुल के स्थान के अर्थ में)। इस साइट पर पहले, और कई किताबों में, 'मदुरै' लिखा था; यह पाठ बीसवीं सदी के संपादकों से आया।
- राधाकुंड पर कितने वर्ष
- पाँच (ब्रजोत्सव चंद्रिका; एंटविसल); सात (अमर उजाला 2023; वृंदावन टुडे); लगभग बारह (मीतल 1968; हिंदी विकिपीडिया); सोलह (दैनिक जागरण 2018)।
- गुरु
- कृष्णदास ब्रह्मचारी (प्रियादास 1712; चरितामृत)। गौड़ीय ग्रंथ उन्हें गदाधर पंडित का शिष्य बताते हैं; कुछ लेखक सनातन गोस्वामी का।
- रास का श्रेय
- रास का रूप उनसे पुराना है (हाइन, मीतल, अग्रवाल)। निम्बार्क परंपरा घमंड देव को श्रेय देती है। बाबा कृष्णदास (1949) और ग्राउज़ उन्हें आरंभ करने वाला मानते हैं; विद्वान उन्हें सोलहवीं सदी का सबसे बड़ा संयोजक।
- देह त्याग का वर्ष
- लगभग संवत 1700 (1643), जो उनकी ब्रजोत्सव चंद्रिका की एक भविष्यवाणी से निकलता है और जिससे उनकी आयु 112 वर्ष बनती है (बाबा कृष्णदास; मीतल)। चरितामृत, लघु चरितामृत, हाइन और एंटविसल कोई वर्ष नहीं देते।
- एक जैसे नाम
- केरल के मेलपत्तूर नारायण भट्टतिरि (नारायणीयम) और काशी के नारायण भट्ट अलग व्यक्ति हैं। एंटविसल याद दिलाते हैं कि टोडरमल ने 1585 में काशी वाले नारायण भट्ट की सहायता की थी।
- ललिता जी का जन्मस्थान
- चरितामृत: ऊंचागांव में सखी गिरि। गौड़ीय लेखक: करहला।
- लाड़ले ठाकुर आज
- हिस्ट्री पंडित के अनुसार ऊंचागांव का दाऊजी मंदिर। बाबा कृष्णदास (1961): लाडिलेय नीमराना से उच्चग्राम लौटे।
ब्रज और परंपरा
- स्थान: फिर से पाए, या नए रखे
- परिवार के ग्रंथ हर स्थान को फिर से पाया हुआ मानते हैं। एंटविसल (1987) मानते हैं कि कई स्थान उस समय नए रखे गए, कि ब्रज भक्ति विलास के श्लोक जिन पुराणों के नाम से दिए गए हैं वे नाम ज़्यादातर बाद के लगते हैं, और कि इसके कई वन आज पहचाने नहीं जाते।
- संकेत
- सत्रहवीं सदी के कवि ध्रुवदास ने लिखा: 'प्रकट कियौ संकेत', यानी संकेत उन्होंने प्रकट किया (मीतल 1966)।
- राधारमण जी
- चरितामृत: संकेत में राधारमण जी के कहने पर रास पंचाध्यायी और रसिकाह्लादिनी। राधारमण जी का प्राकट्य भी उनसे जोड़ने की बात केवल ब्रज ब्रेकिंग में मिली।
- कंठी दीक्षा
- बरसाना के सेवायत गोस्वामी भट्ट कुल से कंठी दीक्षा लेते हैं, यह बात केवल वृंदावन टुडे (2026) में मिली। दीक्षा का संबंध परिवार भी बताता है, और लाडिलीदास जी का पुराना मंगल उनके कंठी देने की प्रशंसा करता है।
सभी स्रोत
उनके अपने ग्रंथ, और परिवार के ग्रंथ
- गोस्वामी जानकीप्रसाद भट्ट, श्री नारायण भट्ट चरितामृत (संस्कृत, लगभग 1700), सं. बाबा कृष्णदास, संवत 2013 (1957)
- लघु श्री नारायण भट्ट चरितामृत, किसी अनुयायी का लिखा (नीमराना की संवत 1928 की प्रति से), सं. बाबा कृष्णदास, संवत 2020
- श्री नारायण भट्ट जी, ब्रजोत्सव चंद्रिका (संकल्प संवत 1612), सं. बाबा कृष्णदास, संवत 2017 (1961)
- श्री नारायण भट्ट जी, ब्रज भक्ति विलास (संवत 1609), सं. बाबा कृष्णदास, संवत 2008 (1952)
पुराने साक्षी
- नाभादास जी, श्री भक्तमाल, छप्पय 87 और 88, लगभग 1600 (पाठ: sanskritdocuments.org)
- प्रियादास, भक्तिरसबोधिनी टीका (1712), श्री भक्तमाल में, रूपकला जी के तिलक सहित, 1951 का मुद्रण
- प्रताप सिंह, भक्तमाल अर्थात भक्तकल्पद्रुम, 1866 से 1872 (1926 का मुद्रण)
- एफ़. एस. ग्राउज़, मथुरा: अ डिस्ट्रिक्ट मेमॉयर, तीसरा संस्करण, 1883
शोध
- प्रभुदयाल मीतल, चैतन्य मत और ब्रज साहित्य, 1962
- प्रभुदयाल मीतल, ब्रज का सांस्कृतिक इतिहास, 1966
- प्रभुदयाल मीतल, ब्रज के धर्म संप्रदायों का इतिहास, 1968
- विजयेंद्र स्नातक, राधावल्लभ संप्रदाय: सिद्धांत और साहित्य, 1957 (पृष्ठ 280 पर बाबा कृष्णदास की 1949 की पुस्तिका का उद्धरण)
- गोविंद दास और रामनारायण अग्रवाल (सं.), ब्रज और ब्रज यात्रा, 1959
- गोविंद दास और रामनारायण अग्रवाल (सं.), रास लीला: एक परिचय, 1959
- भगवती प्रसाद सिंह और बासुदेव सिंह, राधाकृष्ण भक्तकोश, खंड 4, 1989
- नॉर्विन हाइन, द मिरेकल प्लेज़ ऑफ़ मथुरा, येल यूनिवर्सिटी प्रेस, 1972
- ए. डब्ल्यू. एंटविसल, ब्रज: सेंटर ऑफ़ कृष्ण पिलग्रिमेज, 1987
- छेदीलाल कांस्यकार, द बूढ़ी लीला ऑफ़ ब्रज, संगीत नाटक, खंड 39, अंक 2, 2005
- गोस्वामी लक्ष्मणाचार्य, ब्रज की झाँकी, गीता प्रेस, गोरखपुर (बिना तिथि)
समाचार और वेबसाइटें
- मंदिर श्री लाडली जी महाराज, बरसाना: मंदिर के बारे में (15 अक्टूबर 2026 को देखा)
- अमर उजाला: राधाष्टमी और बरसाना मंदिर, 12 सितंबर 2021
- अमर उजाला, मथुरा: राधारानी को नारायण भट्ट ने दिया था लाडली नाम, 22 सितंबर 2023
- अमर उजाला: अष्टसखी गांवों की दो दिन की परिक्रमा, 5 नवंबर 2025
- दैनिक जागरण, मथुरा: यह परिवार आज भी राधा को मानता पुत्री समान, 16 सितंबर 2018
- दैनिक जागरण: अष्टदल कमल से ब्रह्मांचल पर प्रकटीं सर्वेश्वरी श्रीराधा, 19 सितंबर 2026
- दैनिक भास्कर, मथुरा: बरसाना में बेटियों के नाम राधा रानी के नामों पर, 9 सितंबर 2024
- हिंदुस्तान, मथुरा: श्रीकृष्ण के साथ सनातन रीति से हुआ ललिताजी का विवाह, 23 सितंबर 2026
- प्रभात ख़बर: बरसाना में राधाष्टमी की तैयारी, सितंबर 2023
- वृंदावन टुडे, जगन्नाथ पोद्दार: भट्ट कुल से चलती राधाष्टमी की प्राचीन परंपरा, 19 सितंबर 2026
- वृंदावन टुडे: ब्रज में राधा रानी का जन्मोत्सव, 23 सितंबर 2023
- वृंदावन टुडे: बरसाना की लाडली जी, गोस्वामी श्री नारायण भट्ट की लाड़ली बेटी (बिना तिथि)
- ब्रज ब्रेकिंग: श्रद्धापूर्वक मनाई गई नारायण भट्ट जी की जयंती, 12 मई 2025
- ब्रज ब्रेकिंग: जयंती की सूचना, 9 मई 2025
- ब्रज ब्रेकिंग: हर्षोल्लास के साथ मनाई ब्रजोद्धारक नारायण भट्ट की जयंती, 22 मई 2024
- ब्रज ब्रेकिंग: ऊंचागांव और नंदगांव में दाऊजी का प्राकट्योत्सव, 30 जुलाई 2025
- ब्रज ब्रेकिंग: ऊंचागांव में धूमधाम से मनाया गया ललिता जन्मोत्सव, 29 अगस्त 2025
- ब्रज ब्रेकिंग: लाडलेय ठाकुर संग अष्ट सखी परिक्रमा, 30 अक्टूबर 2025
- ब्रज ब्रेकिंग: सुरभि होली में जमकर बरसा राधाकृष्ण का प्रेम रंग, 22 मार्च 2024
- विवेक दत्त मथुरिया, हिस्ट्री पंडित, 6 मई 2020
- विवेक दत्त (मथुरा), 'नारायण भट्ट ने दिया राधा को लाडो नाम', अख़बार का इतिहास पन्ना
- हिंदी विकिपीडिया: नारायण भट्ट
- अंग्रेज़ी विकिपीडिया: राधा रानी मंदिर
- इस्कॉन डिज़ायर ट्री: ऊंचागांव
- इस्कॉन डिज़ायर ट्री: ललिता सखी का प्राकट्य दिवस
आगे पढ़ने के लिए: लीना तनेजा, द फ़ॉरगॉटन स्टोरी ऑफ़ नारायण भट्ट, जर्नल ऑफ़ वैष्णव स्टडीज़ 15(2)
सुधार
अक्टूबर 2026 के शोध के बाद इस साइट पर ये बातें बदली गईं:
- जन्मस्थान: पहले 'मदुरै' लिखा था। उनके अपने ग्रंथ गोदावरी तट की पुष्कली नगरी कहते हैं।
- राधाकुंड पर वर्ष: पहले 'बारह' लिखा था। उनकी ब्रजोत्सव चंद्रिका पाँच कहती है।
- '300 से अधिक स्थल': यह संख्या किसी पुराने स्रोत में नहीं मिली। ब्रज भक्ति विलास स्वयं 137 वन और 16 वट गिनता है।
- रास लीला: पहले उन्हें इसका आरंभ करने वाला लिखा था। विद्वान रास का रूप उनसे पुराना मानते हैं, और उन्हें उसका सबसे बड़ा संयोजक।
- ब्रजाचार्य पीठ का नाम: पीठों के नाम और उपाधियाँ परिवार से पक्की होने तक साइट उनके नाम से है।
अनुवाद के बारे में
संस्कृत मूल पाठ सैकड़ों वर्ष पुराने हैं और सबके लिए खुले हैं। बाबा कृष्णदास के हिंदी अनुवाद और भूमिकाएँ हम नहीं छापते; उनका सार अपने शब्दों में देते हैं, और उन्हें यहाँ श्रेय देते हैं। इस साइट पर श्लोकों के अर्थ हमारे अपने हैं।
चित्र श्रेय
नारायण भट्ट जी का पारंपरिक चित्र, भित्ति चित्र, चरण पादुका और महाराज जी की तस्वीर परिवार की हैं, और समाधि की तस्वीर हिस्ट्री पंडित की; इनके सब अधिकार उन्हीं के पास हैं। बाकी तस्वीरें विकिमीडिया कॉमन्स से हैं और अपने लाइसेंस के अधीन हैं; हमने उन्हें छोटा किया है, और CC BY-SA चित्रों के ये बदले रूप भी उसी लाइसेंस में हैं। पुराने चित्र पब्लिक डोमेन में हैं, या संग्रहालयों ने उन्हें सबके लिए खोल दिया है (CC0)।
ब्रह्मांचल पर्वत, बरसाना
चित्र: Kridha20, CC BY-SA 4.0
साँझ में श्री लाडली जी मंदिर
चित्र: Abhijit Kar Gupta, CC BY 2.0
श्री लाडली जी मंदिर का प्रांगण
चित्र: Kridha20, CC BY-SA 4.0
श्री लाडली जी मंदिर, सामने से
चित्र: Aliva Sahoo, CC BY-SA 3.0
मंदिर तक की सीढ़ियाँ
चित्र: GourangaUK, English Wikipedia, CC BY-SA 3.0
श्रील गोस्वामी नारायण भट्ट जी महाराज, पारंपरिक चित्र
चित्र: परिवार का पारंपरिक चित्र
भित्ति चित्र, हाथ में ब्रज भक्ति विलास
चित्र: परिवार का भित्ति चित्र
भित्ति चित्र, वन में
चित्र: परिवार का भित्ति चित्र
श्रील नारायण भट्ट जी की चरण पादुका
चित्र: परिवार के पास
उनकी समाधि, ऊंचागांव
चित्र: हिस्ट्री पंडित
गोस्वामी श्री कृष्णानंद भट्ट जी महाराज
चित्र: परिवार के पास
राधाकुंड और श्यामकुंड
चित्र: Aliva Sahoo, CC BY-SA 3.0
गिरिराज और परिक्रमा मार्ग, जतीपुरा
चित्र: Manish kumar ambesh, CC BY-SA 4.0
कुसुम सरोवर
चित्र: Arjunfotografer, CC BY-SA 4.0
मानसी गंगा, 1883
चित्र: एफ़. एस. ग्राउज़ की 1883 की पुस्तक का चित्र, पब्लिक डोमेन
ब्रज परिक्रमा की पिछवाई
चित्र: अज्ञात चित्रकार, राजस्थान, उन्नीसवीं सदी, पब्लिक डोमेन
राधा, किशनगढ़ का चित्र
चित्र: किशनगढ़, राजस्थान, लगभग 1750, द मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट, पब्लिक डोमेन
कुंज में राधा और कृष्ण
चित्र: कोटा के उस्ताद चित्रकार, लगभग 1720, द मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट, पब्लिक डोमेन
दान लीला का चित्र
चित्र: पहाड़ी चित्रकार, लगभग 1760, क्लीवलैंड म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट, CC0
रासलीला, उदयपुर, 1736
चित्र: जय राम और जीवा (माने जाते हैं), उदयपुर, 1736, क्लीवलैंड म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट, CC0
नंदगांव
चित्र: Hemant Shesh, CC BY-SA 4.0
लट्ठमार होली, बरसाना
चित्र: Avis19871, CC BY-SA 4.0
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